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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 48
श्लोक
1.22.48
उभयोस्त्वविभागेन साध्यसाधनयोर्हि यत्।
विज्ञानमद्वैतमयं तद्भागोऽन्यो मयोदित:॥ ४८॥
अनुवाद
इन दो लक्ष्यों और साधनों के अद्वैत ज्ञान को मैं तीसरे प्रकार का कहता हूँ ॥48॥
I call the non-dual knowledge of these two goals and means the third type. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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