| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन » श्लोक 47 |
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| | | | श्लोक 1.22.47  | युञ्जत: क्लेशमुक्त्यर्थं साध्यं यद्ब्रह्म योगिन:।
तदालम्बनविज्ञानं द्वितीयोंऽशो महामुने॥ ४७॥ | | | | | | अनुवाद | | हे महामुने! दुःखों के बन्धन से मुक्त होने के लिए योगाभ्यास करने वाले योगी का जो साक्षात् स्वरूप ब्रह्म है, उसका ज्ञान ही 'आलंबन-विज्ञान' नामक दूसरी शाखा है॥47॥ | | | | Brahma, who is the practical form of a Yogi who practices Yoga, to become free from the bondage of suffering, O Mahamune! Its knowledge itself is the second branch called ‘Alamban-Vigyan’. 47॥ | | ✨ ai-generated | | |
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