श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.22.46 
साधनालम्बनं ज्ञानं मुक्तये योगिनां हि यत्।
स भेद: प्रथमस्तस्य ब्रह्मभूतस्य वै मुने॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे मुनि! जो 'साधनों का ज्ञान' योगी के लिए मोक्ष का कारण है, वह उस परमपद का प्रथम प्रकार है जो ब्रह्म का सार है।*॥46॥
 
O Muni! The 'knowledge of means' which is the cause of liberation for a Yogi is the first type of that supreme state which is the essence of Brahma *॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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