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श्लोक 1.22.44  |
श्रीपराशर उवाच
मैत्रेय कारणं प्रोक्तं साधनं सर्ववस्तुषु।
साध्यं च वस्त्वभिमतं यत्साधयितुमात्मन:॥ ४४॥ |
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| अनुवाद |
| श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! सब वस्तुओं का कारण ही उनका साधन भी है और जो वस्तु अपनी इच्छा से प्राप्त होती है, उसे साध्य कहते हैं ॥ 44॥ |
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| Shri Parashara said - O Maitreya! The cause of all things is also their means and the thing which is achieved as per one's own wish is called the goal. ॥ 44॥ |
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