श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.22.44 
श्रीपराशर उवाच
मैत्रेय कारणं प्रोक्तं साधनं सर्ववस्तुषु।
साध्यं च वस्त्वभिमतं यत्साधयितुमात्मन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! सब वस्तुओं का कारण ही उनका साधन भी है और जो वस्तु अपनी इच्छा से प्राप्त होती है, उसे साध्य कहते हैं ॥ 44॥
 
Shri Parashara said - O Maitreya! The cause of all things is also their means and the thing which is achieved as per one's own wish is called the goal. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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