श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.22.42 
तच्च ज्ञानमयं व्यापि स्वसंवेद्यमनौपमम्।
चतुष्प्रकारं तदपि स्वरूपं परमात्मन:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वह परमात्मा का स्वरूप ज्ञानमय, सर्वव्यापक, स्वयंप्रकाशमान और अद्वितीय है तथा चार प्रकार का ही है ॥ 42॥
 
That form of the Supreme Being is knowledgeable, all-pervasive, self-perceptible (self-illuminating) and unique and it is of four types only. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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