| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 1.22.41  | सृष्टिस्थित्यन्तकालेषु त्रिधैवं सम्प्रवर्तते।
गुणप्रवृत्त्या परमं पदं तस्यागुणं महत्॥ ४१॥ | | | | | | अनुवाद | | इसी प्रकार जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय के समय वे तीनों गुणों से प्रेरित होते हैं, फिर भी उनकी परम स्थिति महान् और निर्गुण है ॥41॥ | | | | Similarly, at the time of origin, state and end of the world, He is inspired by the three Gunas, yet His supreme state is great and nirguna. 41॥ | | ✨ ai-generated | | |
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