vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
»
श्लोक 40
श्लोक
1.22.40
एवमेष जगत्स्रष्टा जगत्पाता तथा जगत्।
जगद्भक्षयिता देव: समस्तस्य जनार्दन:॥ ४०॥
अनुवाद
इस प्रकार वे जनार्दनदेव सम्पूर्ण जगत् के रचयिता, पालक और संहारक हैं तथा वे स्वयं जगत् के स्वरूप हैं ॥40॥
Thus, that Janardandev is the creator, preserver and destroyer of the entire universe and He is the very form of the universe itself. ॥40॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas