श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.22.39 
हन्ति यावच्च यत्किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम्।
जनार्दनस्य तद्रौद्रं मैत्रेयान्तकरं वपु:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इसी प्रकार जो कोई भी स्थावर-जंगम प्राणियों का नाश करता है, वह नाश करने वाला भी श्री जनार्दन का ही भयंकर रूप है।॥39॥
 
O Maitreya! Similarly, whoever destroys any of the mobile and immobile beings, that destroyer is also the destructive fierce form of Shri Janardan. ॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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