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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 38
श्लोक
1.22.38
यत्किञ्चित्सृज्यते येन सत्त्वजातेन वै द्विज।
तस्य सृज्यस्य सम्भूतौ तत्सर्वं वै हरेस्तनु:॥ ३८॥
अनुवाद
हे द्विज! जो भी प्राणी जो कुछ भी उत्पन्न करता है, उस प्राणी की सृष्टि का कारण श्री हरि का शरीर ही है ॥38॥
O twice born! Whatever is created by any living being, the body of Shri Hari is the cause behind the creation of that being. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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