श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.22.37 
एवमेव विभागोऽयं स्थितावप्युपदिश्यते।
चतुर्धा तस्य देवस्य मैत्रेय प्रलये तथा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इसी प्रकार जगत् की उत्पत्ति और संहार में उन देवी-देवताओं के चार विभाग बताये गये हैं ॥37॥
 
O Maitreya! Similarly, in the creation and destruction of the world, four divisions of those gods and goddesses are mentioned. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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