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श्लोक 1.22.37  |
एवमेव विभागोऽयं स्थितावप्युपदिश्यते।
चतुर्धा तस्य देवस्य मैत्रेय प्रलये तथा॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| हे मैत्रेय! इसी प्रकार जगत् की उत्पत्ति और संहार में उन देवी-देवताओं के चार विभाग बताये गये हैं ॥37॥ |
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| O Maitreya! Similarly, in the creation and destruction of the world, four divisions of those gods and goddesses are mentioned. ॥ 37॥ |
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