श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.22.34 
जगदादौ तथा मध्ये सृष्टिराप्रलयाद् द्विज।
धात्रा मरीचिमिश्रैश्च क्रियते जन्तुभिस्तथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! जगत के आदि और मध्य में तथा अन्त तक ब्रह्मा, मरीचि आदि तथा भिन्न-भिन्न जीवों से ही सृष्टि होती है॥34॥
 
Hey Dwija! In the beginning and middle of the world and even till the end, creation takes place only from Brahma, Marichi etc. and different living beings. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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