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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 33
श्लोक
1.22.33
रुद्र: कालान्तकाद्याश्च समस्ताश्चैव जन्तव:।
चतुर्धा प्रलयायैता जनार्दनविभूतय:॥ ३३॥
अनुवाद
तथा रुद्र, काल, अन्तकादि और सकल जीव- ये श्री जनार्दन की चार विभूतियाँ विनाश के कारण हैं ॥33॥
And Rudra, Kaal, Antakadi and Sakal Jiva – these four personalities of Shri Janardan are the causes of destruction. 33॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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