श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.22.32 
विष्णुर्मन्वादय: काल: सर्वभूतानि च द्विज।
स्थितेर्निमित्तभूतस्य विष्णोरेता विभूतय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! विष्णु, मनु आदि, काल तथा सम्पूर्ण भूत- ये जगत् की स्थिति के कारण भगवान विष्णु के ही स्वरूप हैं॥32॥
 
Hey Dwija! Vishnu, Manu etc., Kaal and all the ghosts – these are the manifestations of Lord Vishnu who is the cause of the condition of the world. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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