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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 30
श्लोक
1.22.30
विनाशं कुर्वतस्तस्य चतुर्द्धैवं महात्मन:।
विभागकल्पना ब्रह्मन्कथ्यतेसार्वकालिकी॥ ३०॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! ये चार प्रकार के सनातन विभाग उस महात्मा की विनाश करने की कल्पना कही गई है ॥30॥
Hey Brahman! These four types of eternal divisions are said to be the imagination of that Mahatma to cause destruction. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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