श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  1.22.28-29 
आश्रित्य तमसो वृत्तिमन्तकाले तथा पुन:।
रुद्रस्वरूपो भगवानेकांशेन भवत्यज:॥ २८॥
अग्न्यन्तकादिरूपेण भागेनान्येन वर्त्तते।
कालस्वरूपो भागो यस्सर्वभूतानि चापर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
और अन्त समय में वह अजन्मा परमेश्वर तमोगुण की वृत्ति का आश्रय लेकर एक अंश से रुद्ररूप, दूसरे अंश से अग्नि और अन्तकादि रूप, तीसरे अंश से कालरूप और चौथे अंश से सम्पूर्ण भूतरूप हो जाता है ॥28-29॥
 
And in the final time, that unborn God, taking shelter of the instinct of Tamoguna, becomes Rudra form from one part, Agni and Antakadi form from the second part, Kaal form from the third and complete ghost form from the fourth. 28-29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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