श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.22.24-25 
एकेनांशेन ब्रह्मासौ भवत्यव्यक्तमूर्त्तिमान्।
मरीचिमिश्रा: पतय: प्रजानां चान्यभागश:॥ २४॥
कालस्तृतीयस्तस्यांश: सर्वभूतानि चापर:।
इत्थं चतुर्धा संसृष्टौ वर्त्ततेऽसौ रजोगुण:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
एक भाग से वे अव्यक्त ब्रह्मा हैं, दूसरे भाग से मरीचि आदि प्रजापति हैं, उनका तीसरा भाग काल है और चौथा भाग सम्पूर्ण भूत है। इस प्रकार वे रजोगुण विशेष सृष्टि के समय चार प्रकार से स्थित होते हैं ॥24-25॥
 
From one part he is the unmanifested Brahma, from the second part he is Prajapati like Marichi, his third part is Kaal and the fourth part is the entire being. In this way, those Rajoguna specifics are situated in four ways at the time of creation. 24-25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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