श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.22.23 
चतुर्विभाग: संसृष्टौ चतुर्धा संस्थित: स्थितौ।
प्रलयं च करोत्यन्ते चतुर्भेदो जनार्दन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वे जनार्दन सृष्टिकाल में चार भागों में और अस्तित्वकाल में चार भागों में स्थित रहते हैं। वे चार रूप धारण करते हैं और अन्त में प्रलय करते हैं ॥23॥
 
That Janardan exists in four parts during the creation and in four parts during the existence. He takes four forms and in the end causes destruction. ॥23॥
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