vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
»
श्लोक 21
श्लोक
1.22.21
न हि पालनसामर्थ्यमृते सर्वेश्वरं हरिम्।
स्थितं स्थितौ महाप्राज्ञ भवत्यन्यस्य कस्यचित्॥ २१॥
अनुवाद
हे महामुनि! जगत के पालन में संलग्न परम प्रभु श्री हरि के अतिरिक्त अन्य किसी में भी इसका पालन करने की शक्ति नहीं है। 21॥
O great sage! Except the Supreme Lord Shri Hari, who is involved in the maintenance of the universe, no one else has the power to maintain it. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×