श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 18-20
 
 
श्लोक  1.22.18-20 
ये तु देवाधिपतयो ये च दैत्याधिपास्तथा।
दानवानां च ये नाथा ये नाथा: पिशिताशिनाम्॥ १८॥
पशूनां ये च पतय: पतयो ये च पक्षिणाम्।
मनुष्याणां च सर्पाणां नागानामधिपाश्च ये॥ १९॥
वृक्षाणां पर्वतानां च ग्रहाणां चापि येऽधिपा:।
अतीता वर्त्तमानाश्च ये भविष्यन्ति चापरे।
ते सर्वे सर्वभूतस्य विष्णोरंशसमुद्भवा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो कोई देवता, दानव, पिशाच और मांसाहारी प्राणियों का अधिपति है, जो कोई पशु, पक्षी, मनुष्य, नाग और सर्पों का नेता है, जो कोई वृक्ष, पर्वत और लोकों का स्वामी है, तथा भूत, वर्तमान और भविष्य के अन्य सभी प्राणी हैं, वे सभी सर्वव्यापी भगवान विष्णु के अंश से उत्पन्न हुए हैं॥18-20॥
 
Whosoever is the ruler of the gods, demons, devils and carnivores, whosoever is the leader of animals, birds, human beings, serpents and serpents, whosoever is the lord of trees, mountains and planets, and all other beings of the past, present and future, all are born from the part of the omnipresent Lord Vishnu.॥ 18-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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