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श्लोक 1.22.15  |
तैरियं पृथिवी सर्वा सप्तद्वीपा सपत्तना।
यथाप्रदेशमद्यापि धर्मत: परिपाल्यते॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| आज तक वे सात द्वीपों और अनेक नगरों वाली सम्पूर्ण पृथ्वी का अपने-अपने विभागों के अनुसार धर्मपूर्वक पालन करते हैं ॥15॥ |
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| Till today they look after the whole earth which consists of seven islands and numerous cities in a righteous manner according to their respective departments. ॥ 15॥ |
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