श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 22: विष्णु भगवान‍्की विभूति और जगत‍्की व्यवस्थाका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.22.13 
पश्चिमस्यां दिशि तथा रजस: पुत्रमच्युतम्।
केतुमन्तं महात्मानं राजानं सोऽभ्यषेचयत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पश्चिम दिशा में कभी न गिरने वाले राजा के पुत्र महात्मा केतुमान को स्थापित किया ॥13॥
 
He established Mahatma Ketuman, the king's son who never falls, in the west direction. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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