श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.21.41 
यदुक्तं वै भगवता तेनैव मरुतोऽभवन्।
देवा एकोनपञ्चाशत्सहाया वज्रपाणिन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रदेव ने उनसे कहा था कि ‘मा रोदि:’ (मत रोओ), इसीलिए वे मरुत कहलाए। ये उनचास मरुद्गण इन्द्र के सहायक देवता हुए ॥41॥
 
Lord Indra had told him that ‘Ma Rodi:’ (Don’t cry), that is why he was called Marut. These forty nine Marudganas became the assistant deities of Indra. 41॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे एकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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