श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  1.21.37-38 
अकृत्वा पादयो: शौचं दिति: शयनमाविशत्।
निद्रा चाहारयामास तस्या: कुक्षिं प्रविश्य स:॥ ३७॥
वज्रपाणिर्महागर्भं चिच्छेदाथ स सप्तधा।
सम्पीडॺमानो वज्रेण स रुरोदातिदारुणम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
एक दिन दिति बिना पांव धोए ही शय्या पर लेट गई। उस समय उसे निद्रा आ गई। तब इंद्र ने हाथ में वज्र लेकर उसके गर्भ में प्रवेश किया और उसके सात टुकड़े कर दिए। इस प्रकार वज्र से आघात पाकर गर्भ जोर-जोर से रोने लगा। 37-38
 
One day Diti lay down on her bed without purifying her feet. At that time she was overcome by sleep. Then Indra entered her womb with a thunderbolt in his hand and broke the great womb into seven pieces. Being thus struck by the thunderbolt, the womb began to cry loudly. 37-38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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