श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.21.35 
गर्भमात्मवधार्थाय ज्ञात्वा तं मघवानपि।
शुश्रूषुस्तामथागच्छद्विनयादमराधिप:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उस गर्भ को अपनी मृत्यु का कारण जानकर देवराज इन्द्र भी विनीत भाव से उसकी सेवा करने आये। 35.
 
Knowing that womb to be the reason for his death, even Devaraj Indra came humbly to serve her. 35.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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