vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
»
श्लोक 35
श्लोक
1.21.35
गर्भमात्मवधार्थाय ज्ञात्वा तं मघवानपि।
शुश्रूषुस्तामथागच्छद्विनयादमराधिप:॥ ३५॥
अनुवाद
उस गर्भ को अपनी मृत्यु का कारण जानकर देवराज इन्द्र भी विनीत भाव से उसकी सेवा करने आये। 35.
Knowing that womb to be the reason for his death, even Devaraj Indra came humbly to serve her. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×