श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.21.34 
इत्येवमुक्त्वा तां देवीं सङ्गत: कश्यपो मुनि:।
दधार सा च तं गर्भं सम्यक्छौचसमन्विता॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर कश्यप ऋषि ने देवी के साथ समागम किया और देवी ने अत्यंत पवित्र जीवन जीते हुए गर्भ धारण किया।
 
Saying this, the sage Kasyapa had intercourse with the goddess, and she conceived the child while living a very pure life.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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