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श्लोक 1.21.33  |
शक्रं पुत्रो निहन्ता ते यदि गर्भं शरच्छतम्।
समाहितातिप्रयता शौचिनी धारयिष्यसि॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| यदि तू भगवान् के प्रति सजग रहकर तथा संयमपूर्वक सौ वर्ष तक गर्भ धारण कर सके, तो तेरा पुत्र ही इन्द्र का वध करने वाला होगा॥33॥ |
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| “If you can bear your pregnancy for a hundred years by being alert to God and with restraint, then your son will be the one who will kill Indra.” 33॥ |
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