श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.21.33 
शक्रं पुत्रो निहन्ता ते यदि गर्भं शरच्छतम्।
समाहितातिप्रयता शौचिनी धारयिष्यसि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
यदि तू भगवान् के प्रति सजग रहकर तथा संयमपूर्वक सौ वर्ष तक गर्भ धारण कर सके, तो तेरा पुत्र ही इन्द्र का वध करने वाला होगा॥33॥
 
“If you can bear your pregnancy for a hundred years by being alert to God and with restraint, then your son will be the one who will kill Indra.” 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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