vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
»
श्लोक 33
श्लोक
1.21.33
शक्रं पुत्रो निहन्ता ते यदि गर्भं शरच्छतम्।
समाहितातिप्रयता शौचिनी धारयिष्यसि॥ ३३॥
अनुवाद
यदि तू भगवान् के प्रति सजग रहकर तथा संयमपूर्वक सौ वर्ष तक गर्भ धारण कर सके, तो तेरा पुत्र ही इन्द्र का वध करने वाला होगा॥33॥
“If you can bear your pregnancy for a hundred years by being alert to God and with restraint, then your son will be the one who will kill Indra.” 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×