श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.21.32 
स च तस्मै वरं प्रादाद्भार्यायै मुनिसत्तम:।
दत्त्वा च वरमत्युग्रं कश्यपस्तामुवाच ह॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महर्षि कश्यप ने वह वरदान अपनी पत्नी को दिया और वह अत्यन्त कठोर वरदान देते हुए उससे कहा -॥32॥
 
The great sage Kasyapa gave that boon to his wife and while giving that extremely harsh boon he said to her -॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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