श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.21.29 
पूर्वं यत्र तु सप्तर्षीनुत्पन्नान्सप्तमानसान्।
पितृत्वे कल्पयामास स्वयमेव पितामह:।
गन्धर्वभोगिदेवानां दानवानां च सत्तम॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! पूर्व मन्वन्तर में ब्रह्माजी के मानस पुत्र रूप में उत्पन्न हुए सात ऋषियों को ब्रह्माजी ने इस कल्प में गन्धर्व, नाग, देव और दानवदि के पूर्वज के रूप में पुष्टि की है।
 
O great sage! In the pre-Manvantar, the seven sages who were born as mental sons of Brahmaji themselves, were confirmed by Brahmaji as the ancestors of Gandharva, Naga, Dev and Danavadi in this Kalpa. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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