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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 28
श्लोक
1.21.28
वैवस्वते च महति वारुणे वितते कृतौ।
जुह्वानस्य ब्रह्मणो वै प्रजासर्ग इहोच्यते॥ २८॥
अनुवाद
वैवस्वत-मन्वन्तर के प्रारम्भ में वरुण का एक महान यज्ञ हुआ, उसमें ब्रह्माजी उपस्थित थे, अब मैं उनके लोकों का वर्णन करूँगा ॥28॥
At the beginning of Vaivasvat-Manvantar, a great Yagya of Varuna was performed, Brahmaji was present in it, now I will describe his people. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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