श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.21.26 
एते कश्यपदायादा: कीर्त्तिता: स्थाणुजङ्गमा:।
तेषां पुत्राश्च पौत्राश्च शतशोऽथ सहस्रश:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ये सभी स्थावर-जंगम प्राणी कश्यपजी की संतानें थीं। उनके सैकड़ों और हजारों पुत्र और पौत्र भी थे॥26॥
 
All these mobile and immobile beings were the children of Kashyapji. He also had hundreds and thousands of sons and grandsons.॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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