श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.21.23 
गणं क्रोधवशं विद्धि तस्या: सर्वे च दंष्ट्रिण:।
स्थलजा: पक्षिणोऽब्जाश्च दारुणा: पिशिताशना:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
क्रोधवशा के पुत्र क्रोधवशगण हैं। ये सभी जलचर, थलचर, पक्षी, बड़े-बड़े दांतों वाले, भयंकर और कच्चा मांस खाने वाले हैं।
 
The sons of Krodhavasha are the Krodhavashaganas. All of them are aquatic, terrestrial and birds with large teeth, and are fierce and eat raw meat. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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