श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.21.2-3 
बले: पुत्रशतं त्वासीद‍्बाणज्येष्ठं महामुने।
हिरण्याक्षसुताश्चासन्सर्व एव महाबला:॥ २॥
उत्कुर: शकुनिश्चैव भूतसन्तापनस्तथा।
महानाभो महाबाहु: कालनाभस्तथापर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! बालिका के सौ पुत्र थे, जिनमें बाणासुर सबसे बड़ा था। हिरण्याक्ष के पुत्र उत्कुर, शकुनि, भूतसंतपन, महानाभ, महाबाहु और कलनाभ आदि सभी अत्यंत शक्तिशाली थे। 2-3॥
 
Oh great sage! Balika had a hundred sons, of whom Banasur was the eldest. Hiranyaksha's sons Utkur, Shakuni, Bhootasantapan, Mahanabha, Mahabahu and Kalnabha etc. were all very powerful. 2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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