श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.21.19 
सुरसायां सहस्रं तु सर्पाणाममितौजसाम्।
अनेकशिरसां ब्रह्मन् खेचराणां महात्मनाम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! सुरसा से हजारों सर्प उत्पन्न हुए जो अत्यन्त प्रभावशाली, आकाश में विचरण करने वाले, अनेक सिरों वाले और अत्यन्त विशाल थे॥19॥
 
O Brahman! From Surasa were born thousands of serpents who were very impressive, roamed in the sky, had many heads and were very huge.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)