श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद‍्गणकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.21.14 
प्रह्लादस्य तु दैत्यस्य निवातकवचा: कुले।
समुत्पन्ना: सुमहता तपसा भावितात्मन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी के कुल में निवातकवच नामक एक राक्षस उत्पन्न हुआ, वह राक्षस घोर तप से आत्मज्ञान प्राप्त करने वाला था ॥14॥
 
A demon named Nivatakavacha was born in the family of Prahladji, a demon who attained self-knowledge through great penance. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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