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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
1.21.10
ततोऽपरे महावीर्या दारुणास्त्वतिनिर्घृणा:।
सिंहिकायामथोत्पन्ना विप्रचित्ते: सुतास्तथा॥ १०॥
अनुवाद
इनके अतिरिक्त विप्रचित्तिके सिंहिका के गर्भ से और भी बहुत से पराक्रमी, भयंकर तथा अत्यन्त क्रूर पुत्र उत्पन्न हुए ॥10॥
Apart from these, many more powerful, fierce and extremely cruel sons were born from the womb of Viprachittike Simhika. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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