श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.20.4 
योगप्रभावात्प्रह्लादे जाते विष्णुमयेऽसुरे।
चलत्युरगबन्धैस्तैर्मैत्रेय त्रुटितं क्षणात्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार जब दैत्य प्रह्लाद योगबल से भगवान विष्णु से एकाकार हो गया, तब वह व्याकुल हो गया और क्षण भर में ही सर्प का पाश टूट गया॥4॥
 
O Maitreya! In this way, when the demon Prahlada became one with Lord Vishnu through the power of yoga, he got disturbed and the noose of the serpent broke in a moment. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)