श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.20.12 
नित्यानित्यप्रपञ्चात्मन्निष्प्रपञ्चामलाश्रित।
एकानेक नमस्तुभ्यं वासुदेवादिकारण॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे सनातन (आकाशस्वरूप) प्रपंचात्मान! हे संसार से पृथक रहने वाले! हे ज्ञानियों के आश्रयस्वरूप! हे एकमात्र आदि कारण वासुदेव! आपको नमस्कार है। 12॥
 
O eternal (in the form of sky) Prapanchaatman! O one who remains separate from worldly matters! O form of shelter for the wise! O one and only one, the original cause, Vasudev! [Greetings to you]. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)