श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.20.11 
करालसौम्यरूपात्मन‍‍्विद्याऽविद्यामयाच्युत।
सदसद्‍रूपसद्भाव सदसद्भावभावन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भयंकर और सुन्दर रूप! हे ज्ञान और अज्ञान से परिपूर्ण अच्युत! हे शुभ और अशुभ (कार्य और कारण) रूप से जगत के मूल और शुभ और अशुभ के रक्षक! [आपको नमस्कार है]॥11॥
 
O fierce and beautiful form! O Achyuta, full of knowledge and ignorance! O the origin of the world in the form of good and bad (action and cause) and the protector of the good and the bad! [Salutations to you]॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)