श्रीपराशर उवाच
एवं सञ्चिन्तयन्विष्णुमभेदेनात्मनो द्विज।
तन्मयत्वमवाप्याग्रॺं मेने चात्मानमच्युतम्॥ १॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे द्विज! इस प्रकार जब भगवान विष्णु आत्मचिंतन में पूर्णतया लीन हो गए, तब उन्होंने स्वयं को अच्युत रूप में अनुभव किया॥1॥
Shri Parasharji said – O Dwij! In this way, when Lord Vishnu became completely absorbed in thinking about himself, he experienced himself as the Achyuta Form. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥