Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.2.67: वे भगवान विष्णु सृष्टिकर्ता (ब्रह्मा) होकर अपनी सृष्टि स्वयं रचते हैं; पालनकर्ता विष्णु होकर अपनी संतान का पालन-पोषण करते हैं और अन्त में स्वयं ही संहारकर्ता (शिव) होकर स्वयं ही लीन (लीन) हो जाते हैं।॥ 67॥ | vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्रष्टा सृजति चात्मानं विष्णु: पाल्यं च पाति च।
उपसंह्रियते चान्ते संहर्ता च स्वयं प्रभु:॥ ६७॥
अनुवाद
वे भगवान विष्णु सृष्टिकर्ता (ब्रह्मा) होकर अपनी सृष्टि स्वयं रचते हैं; पालनकर्ता विष्णु होकर अपनी संतान का पालन-पोषण करते हैं और अन्त में स्वयं ही संहारकर्ता (शिव) होकर स्वयं ही लीन (लीन) हो जाते हैं।॥ 67॥
That Lord Vishnu, being the creator (Brahma), creates his own creation; being the preserver Vishnu, he nurtures his own child and in the end he is himself the destroyer (Shiva) and himself gets absorbed (absorbed).॥ 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥