श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.19.86 
अहमेवाक्षयो नित्य: परमात्मात्मसंश्रय:।
ब्रह्मसंज्ञोऽहमेवाग्रे तथान्ते च पर: पुमान्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
मैं अविनाशी, नित्य और स्वयंभू परब्रह्म हूँ; और मैं ही जगत के आदि और अन्त में स्थित ब्रह्म नाम से प्रसिद्ध परब्रह्म हूँ ॥ 86॥
 
I am the imperishable, eternal and self-subsistent Supreme Being; and I am the Supreme Being known as Brahman situated at the beginning and end of the universe. ॥ 86॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे एकोनविंशतितमोऽध्याय:॥ १९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)