सर्वगत्वादनन्तस्य स एवाहमवस्थित:।
मत्त: सर्वमहं सर्वं मयि सर्वं सनातने॥ ८५॥
अनुवाद
भगवान् अनंत और सर्वव्यापी हैं; इसलिए वे मेरे ही रूप में विद्यमान हैं, इसलिए यह सम्पूर्ण जगत् मुझसे उत्पन्न हुआ है, मैं ही यह सब हूँ और यह सब मुझ सनातन में ही विद्यमान है ॥ 85॥
The Lord is infinite and omnipresent; hence He exists in my form, therefore this entire universe has come from me, I am all this and all this exists in me, the eternal one. ॥ 85॥