श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.19.83 
यत्रोतमेतत्प्रोतं च विश्वमक्षरमव्ययम्।
आधारभूत: सर्वस्य स प्रसीदतु मे हरि:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जो यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, जो सनातन हैं और सबके आधार हैं, वे मुझ पर प्रसन्न हों। 83.
 
May Hari, the one in whom this entire universe is permeated, the eternal and the foundation of all, be pleased with me. 83.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas