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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्का सुदर्शनचक्रको भेजना
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श्लोक 8
श्लोक
1.19.8
शारीरं मानसं दु:खं दैवं भूतभवं तथा।
सर्वत्र शुभचित्तस्य तस्य मे जायते कुत:॥ ८॥
अनुवाद
इस प्रकार शुभ विचारों से युक्त होकर मैं शारीरिक, मानसिक, दैविक या भौतिक कोई भी दुःख कैसे सह सकता हूँ? ॥8॥
Being thus full of good thoughts, how can I suffer any physical, mental, divine or material suffering? ॥ 8॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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