श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.19.79 
नमस्तस्मै नमस्तस्मै नमस्तस्मै महात्मने।
नाम रूपं न यस्यैको योऽस्तित्वेनोपलभ्यते॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जिसका कोई नाम या रूप नहीं है और जो केवल अपने अस्तित्व से ही प्राप्त होता है, उस महान आत्मा को नमस्कार है, नमस्कार है, नमस्कार है ॥ 79॥
 
Salutations, salutations, salutations to that great soul who has no name or form and who is attained solely by his existence. ॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)