श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.19.78 
ॐ नमो वासुदेवाय तस्मै भगवते सदा।
व्यतिरिक्तं न यस्यास्ति व्यतिरिक्तोऽखिलस्य य:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
ॐ उन भगवान वासुदेव को नमस्कार है, जिनके अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं है और जो स्वयं सब से पृथक (अलिप्त) हैं। ॥ 78॥
 
ॐ Salutations to that Lord Vasudeva, apart from whom there is nothing else and who is himself apart from everything (unattached). ॥ 78॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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