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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्का सुदर्शनचक्रको भेजना
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श्लोक 77
श्लोक
1.19.77
यातीतगोचरा वाचां मनसां चाविशेषणा।
ज्ञानिज्ञानपरिच्छेद्या तां वन्दे स्वेश्वरीं पराम्॥ ७७॥
अनुवाद
मैं उस स्वतंत्र परम सत्ता की पूजा करता हूँ जो वाणी और मन से परे है, विशेषणों से रहित है और ज्ञानियों के ज्ञान से परे है ॥77॥
I worship that independent supreme power which is beyond speech and mind, without adjectives and beyond the knowledge of the wise. 77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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