श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.19.71 
समस्तकर्मभोक्ता च कर्मोपकरणानि च।
त्वमेव विष्णो सर्वाणि सर्वकर्मफलं च यत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
हे विष्णु! आप ही समस्त कर्मों के भोक्ता और कर्ता हैं, तथा आप ही समस्त कर्मों के फल हैं ॥ 71॥
 
O Vishnu! You are the enjoyer and the object of all actions, and you are the fruit of all actions. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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