श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.19.7 
सोऽहं न पापमिच्छामि न करोमि वदामि वा।
चिन्तयन्सर्वभूतस्थमात्मन्यपि च केशवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने सहित समस्त प्राणियों में भगवान केशव को विद्यमान जानकर न तो किसी का बुरा चाहता हूँ, न किसी का बुरा कहता या करता हूँ ॥7॥
 
Knowing that Lord Keshav is present in all creatures including myself, I neither wish ill for anyone nor do I say or do anything bad. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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