श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  1.19.66 
ब्रह्मत्वे सृजते विश्वं स्थितौ पालयते पुन:।
रुद्ररूपाय कल्पान्ते नमस्तुभ्यं त्रिमूर्तये॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
आप ब्रह्मारूप से जगत् की रचना करते हैं, फिर उसकी स्थापना हो जाने पर विष्णुरूप से उसका पालन करते हैं और अन्त में रुद्ररूप से उसका संहार करते हैं - आप तीनों रूपों वाले भगवान् को नमस्कार है ॥ 66॥
 
You create the universe in the form of Brahma, then after it is established, you nurture it in the form of Vishnu and finally destroy it in the form of Rudra - salutations to You who have all the three forms. ॥ 66॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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